शीला की लीला – 22 | Hindi Sex Story

दोनों होटल पर पहुंचे.. और सीधे राजेश के रूम की तरफ गए.. रूम का दरवाजा सिर्फ अटकाया हुआ था पर लोक नहीं था.. हल्का सा धक्का देने पर दरवाजा खुल गया.. कमरे में सन्नाटा था और कोई था भी नही अंदर.. पर बाथरूम से कुछ आवाज़ें आ रही थी.. बाथरूम का दरवाजा भी हल्का सा खुला हुआ था.. शायद राजेश बंद करना भूल गया था

होंठों पर उंगली रखकर पीयूष ने मौसम का “शशशशश” का इशारा किया.. अंदर हो रही बातें बाहर सुनाई दे रही थी

राजेश की सिसकियाँ सुनकर मौसम कमरे से बाहर जाने लगी तो पीयूष ने उसका हाथ पकड़ लिया.. और उसके होंठों को फिर से चूमकर मौसम के कान में कहा “मैडम और सर का प्रोग्राम चल रहा है अंदर.. अभी ये लोग बाहर नही निकलेंगे थोड़ी देर.. ध्यान से सुनना.. “

मौसम डर के मारे कांपने लगी.. अंदर से आ रही कामुक कराहों से ये स्पष्ट पता चल रहा था की रेणुका राजेश का लंड चूस रही थी.. क्योंकि राजेश की आवाज तो आ रही थी पर रेणुका की नही..

“ओह्ह रेणु.. सक ईट.. आह्ह.. ओह गॉड.. बहोत मज़ा आ रहा है.. और जोर से चूस मेरी जान.. पूरा अंदर ले तो ओर मज़ा आएगा.. जितना चुसेगी इतना कडक होगा और तुझे ज्यादा मज़ा देगा अंदर.. आह्ह.. कैसा लग रहा है मेरा लोडा चूसने में जान? आह्ह चूस.. जल्दी जल्दी.. यार तेरे बबले बड़े कमाल के है यार.. आह्ह आह्ह रेणु.. मेरा निकालने ही वाला है तेरे मुंह में.. सारा माल चूस लेना.. बर्थडे केक का क्रीम समझकर.. “​

गीले लंड के चूसने का “बच बच” आवाज सुनाई पड़ रहा था.. अब तो मौसम भी समझ गई की अंदर क्या हो रहा था.. आज जीवन में पहली बार उस एडल्ट शॉप में चित्र-विचित्र वस्तुएं देख ली.. फिर तीन बार पीयूष ने उसे किस किया.. स्तन भी दबा दिए.. और अब राजेश और रेणुका की काम लीला को सुनते हुए मौसम की कच्ची कुंवारी चुत में जबरदस्त खुजली होने लगी थी.. इस नई अनुभूति से वह अनजान थी.. इस खुजली को कैसे शांत किया जाए इसका कोई ज्ञान नही था.. वह केवल पीयूष को पकड़कर उससे लिपट गई.. इतनी जोर से तो कभी कविता ने भी गले नही लगाया था पीयूष को.. मौसम की पकड़ के जोर में उसकी हवस शामिल थी..

मौसम के सख्त स्तनों के दबने से पीयूष पागल सा हो गया.. मौसम ने पीयूष के होंठों पर अपने होंठ दबा दिए..और असह्य उत्तेजना से वह पीयूष के गालों को चाटने लगी.. मौके का फायदा उठाकर पीयूष ने मौसम के टीशर्ट के अंदर हाथ डालकर ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को मसल दिया.. मौसम को यह स्पर्श इतना अच्छा लगा की उसने पीयूष के हाथ को अपनी ब्रा के कटोरी के अंदर ही डाल दिया.. अब तक उसके स्तन और पीयूष के हाथों के बीच ब्रा का आवरण था.. पर अब.. आह्हह.. मौसम के नंगे उरोजों का प्रत्यक्ष स्पर्श करते हुए पीयूष की हथेलियाँ धन्य हो गई.. उसके स्तन नरम होते हुए भी सख्त थे.. ठंडे थे और गरम भी.. वाह.. !!! मौसम की निप्पल को हल्के से मसलते ही वह सिहर उठी.. पीयूष का लंड मौसम की दोनों जांघों के बीच टकरा रहा था.. दोनों अपने होश खो चुके थे.. मौसम अपनी चुत को कपड़े के ऊपर से पीयूष के लंड पर रगड़ रही थी.. उसे पता नही चल रहा था की ऐसा करना उसे किसने सिखाया.. पर उसे बहोत मज़ा आ रहा था.. थोड़ी ही देर में मौसम झड़ गई.. एक लंबी सिसकी लेकर वह शांत हो गई.. ​

उत्तेजना शांत होते ही दोनों को वास्तविकता का ज्ञान हुआ.. साथ ही साथ ये भी एहसास हुआ की वह दोनों किस जगह खड़े थे.. पीयूष तुरंत मौसम का हाथ पकड़कर उसे राजेश के रूम से बाहर ले गया.. मौसम को उसके कमरे में छोड़कर वो उसके और कविता के कमरे की तरफ आया.. दरवाजा बंद था.. काफी देर तक दस्तक देने के बाद कविता ने नींद से जागकर दरवाजा खोला.. उसके कपड़े और बाल अस्तव्यस्त थे.. देखकर पीयूष समझ गया की वह सो रही थी..

कविता ने उससे पूछा तक नही की वो अब तक कहाँ था… किसके साथ था.. क्या कर रहा था.. वह बस अपनी आँखें मलते हुए बिस्तर पर बैठी रही.. तभी उनके दरवाजे पर दस्तक पड़ी.. पीयूष ने दरवाजा खोला.. सामने पिंटू खड़ा था.. पिंटू को देखते ही कविता का उतरा हुआ चेहरा खिल उठा

पिंटू: “पीयूष, राजेश सर ने कहा है की जो गिफ्ट तुम मैडम के लिए लाए हो वह अपने पास ही रखना.. रात की पार्टी में केक-कटिंग के बाद सर उन्हे देंगे.. वैसे सर ने आपको काफी बार फोन किया पर नो-रीप्लाई ही जा रहा था.. इसलिए मुझे यहाँ आना पड़ा.. अगर आप दोनों के रंग में भंग पड़ा हो तो आई एम सॉरी”

पीयूष: “अरे ऐसा कुछ नही है यार पिंटू.. कविता तो मुझसे रूठी हुई है.. इसलिए मेरे तो उपवास ही चल रहे है. “

पिंटू: “अरे ऐसा क्या हो गया?” पिंटू ने चिंता व्यक्त करते हुए पूछा “इतनी रंगीन जगह पर आने के बाद कोई रूठता है क्या भला!! यहाँ के नज़ारे तो देखो एक बार.. अनजान लोग भी दोस्त बन जाते है ऐसा माहोल है यहाँ.. और तुम दोनों पति पत्नी होकर झगड़ रहे हो.. !! अरे भाई, घर वापिस जाकर यही सब तो करना है.. अब इतनी बढ़िया जगह पर आए हो तो इसका पूरा आनंद लो.. “

पीयूष: “भाई, मैं तो ये सब जानता ही हूँ.. तू अपनी भाभी को समझा.. मैं तो थक गया हु इससे”

कविता बिस्तर पर खामोश ही बैठी रही.. उसके चेहरे से उदासी साफ नजर आ रही थी.. ऐसी हालत में भी पीयूष के चेहरे पर चमक थी.. क्यों न हो.. मौसम ने तो उसके दिल के मौसम को बाग बाग जो कर दिया था..

पिंटू: “अरे भाभी.. झगड़ा छोड़ दीजिए.. छोटी सी तो ज़िंदगी है चार पल की.. वो भी झगड़ने रूठने में बर्बाद कर दोगी तो फिर बचेगा क्या? गुस्सा थूक दीजिए और पीयूष को माफ कर दीजिए.. आप दोनों के बीच क्या हुआ है ये तो मुझे नही पता.. और मुझे जानना भी नही है.. पर जो कुछ भी हो.. अभी सुलझा दीजिए.. प्लीज”

“कितनी चिंता है मेरे पिंटू को मेरी” कविता सोच रही थी.. “मेरी उदासी दूर करने के लिए कितनी मिन्नते कर रहा है.. आई लव यू पिंटू” भावुक हो गई कविता और उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे

अपने आँसू पोंछ कर कविता ने पीयूष से कहा “पीयूष, मुझसे कोई गलती हुई हो तो मुझे माफ कर देना.. आई एम सॉरी”

कविता को जवाब दिए बगैर ही पीयूष कमरे के बाहर चला गया.. और जाते जाते पटककर दरवाजा बंद करता गया.. उसके दिमाग पर तो मौसम का सुरूर छाया हुआ था.. कविता और पिंटू स्तब्ध होकर उसे कमरे से जाता देखते ही रहे.. आखिर जब कविता माफी मांग रही थी तो ये पीयूष बेकार में क्यों इतना भाव खा रहा था ?? ऐसा तो कौन सा गुनाह कर दिया था कविता ने ? पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया..

बंद कमरे में कविता पिंटू से लिपट कर फुटफूट कर रोने लगी.. पिंटू डर गया.. अगर पीयूष वापिस लौटकर उन्हे इस स्थिति में देख लेगा तो गजब हो जाएगा.. पर अपनी रोती हुई प्रेमिका को दूर करने की हिम्मत नही थी उसमें.. जो होगा देखा जाएगा.. पिंटू कविता की पीठ सहलाकर उसे शांत करने लगा.. तब तक करता रहा जब तक की उसका रोना बंद नही हुआ.. अपने प्रेमी की बाहों में गजब की शांति मिली कविता को.. वो रीलैक्स हो गई.. पिंटू से अलग होकर वह बोली “थेंक यू पिंटू.. “

“संजयकुमार.. आप मुझे बताएंगे भी की कहाँ लेकर जा रहे है?” शीला परेशान होकर बार बार पूछ रही थी संजय से.. पर संजय बता ही नही रहा था.. शीला चुपछाप अपनी बेग में कपड़े भर रही थी.. उसकी ओर देखकर संजय मुस्कुरा रहा था.. झुककर कपड़े भर रही शीला के गोलमटोल चूतड़ों को देखकर संजय के लंड में झटका लग गया.. सासुमाँ के उन मस्त कूल्हों को दबाने की तीव्र इच्छा को बड़ी मुश्किल से रोका उसने

थोड़ी ही देर में इनोवा गाड़ी शीला के घर के बाहर खड़ी हो गई.. शीला ने घर को ताला लगाया और संजय के साथ पीछे की सीट पर बैठ गई.. ड्राइवर ने सामान गाड़ी में रख दिया.. शीला को घबराहट हो रही थी.. पर अब पीछे हटने का कोई रास्ता ही नही था.. चलो जो होगा देखा जाएगा.. घबराहट के कारण शीला पसीने से तर हो गई थी.. उसके पसीने की मादक गंध सूंघते हुए संजय ने कहा

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संजय: “हम गोवा जा रहे है मम्मी जी.. मज़ा आएगा.. मेरी कंपनी की मीटिंग है वहाँ.. मैं मीटिंग अटेन्ड करूंगा तब तक आप आराम से घूमना.. गोवा का माहोल बड़ा ही मस्त होता है..आपको बहोत मज़ा आएगा”

गोवा का नाम सुनकर शीला के जिस्म में एक सरसराहट सी होने लगी.. वो एक बार मदन के साथ गोवा जा चुकी थी.. वहाँ बीच पर अधनंगी लड़कियों को देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई थी.. पर तब तो साथ में पति था तो ठीक था.. अभी तो ये दामाद के साथ…. क्या होगा वहाँ जाकर?? दामाद के साथ भला कौन गोवा जाता है? वो भी अकेले?? पर अब क्या हो सकता था.. कुछ भी नही !!

गाड़ी ने १२० की स्पीड पकड़ ली थी.. शहर से बाहर निकलते ही संजय ने ड्राइवर से एलसीडी ऑन करने को कहा..

संजय: “कोई मस्त मूवी लगा दे.. !!” इनोवा की छत पर लगा एलसीडी खुलकर सामने आ गया.. शीला की नजर स्क्रीन पर थी पर उसका दिमाग काम नही कर रहा था.. संजय ने सिगरेट जलाई.. धुएं की गंध से शीला को रघु और जीवा के साथ की हुई चुदाई याद आ गई.. पता नही क्यों पर आज शीला को भी सिगरेट फूंकने की इच्छा हो रही थी.. स्वतंत्रता बहोत बुरी चीज है.. इंसान को बुरी से बुरी हरकत करने पर मजबूर कर देती है..

पीछे के सीट पर दो लोगों के लिए काफी जगह थी.. पर साथ में शीला बैठी हो तब संजय कहाँ शांत रहने वाला था.. !!!!

संजय: “मम्मी जी.. यू आर लूकिंग वेरी ब्यूटीफुल” शुरुआत हो गई थी

शीला ने संकोच के साथ कहा “थेंक यू बेटा.. “

संजय ने अपनी टांगें इस तरह चौड़ी कर दी की उसकी जांघ शीला की जांघों से स्पर्श करें.. ज्यादा नही.. पर जरा सा.. छूते ही शीला को पिछली रात बागीचे में हुए स्पर्श की याद ताज़ा हो गई.. यह स्पर्श भी बिल्कुल वैसा ही था.. नही रे नही.. केवल स्पर्श से कैसे किसी इंसान को पहचाना जा सकता है!! तीरछी नज़रों से शीला ने संजय के पेंट में बने उभार को देख लिया.. अब शीला कोई कच्ची कुंवारी या नादान तो थी नही जो उसे पता न चले की वो उभार किस वजह से था !!! साले ये कमीने संजय को अभी किस बात का इरेक्शन हुआ है!! मेरा पैर हल्का सा छु गया इसलिए.. छी छी छी.. मैं भी क्या गंदा गंदा सोच रही हूँ.. मर्दों को तो किसी भी वक्त इरेक्शन हो सकता है.. कभी कभी जोर की पेशाब लगने पर भी ऐसा होता है..

शीला.. शीला.. शीला.. ये तू क्या सोच रही है.. !! अपने दामाद के लंड के बारे में भी भला कोई सास सोचती है कभी!!! अपना ध्यान बँटाने के लिए वो स्क्रीन पर देखने लगी.. अगर कोई ऐसा सॉफ्टवेर होता जिससे किसी व्यक्ति के विचारों का पता लग सके तो क्या होता.. !! शादी की पहली रात को अपने पति का लंड पकड़कर हिला रही लड़की, अपने प्रेमी को याद कर रही हो और अगर उसके पति को अपनी बीवी के विचारों की भनक लग जाए तो कैसा गजब होगा !!! बाथरूम में नहाने गए जवान लड़के को कोने में पड़ी अपनी माँ या बहन की ब्रा और पेन्टी देखकर जो विचार आते है.. उन विचारों के बारे में बाहर बैठी उसकी माँ या बहन को पता चल जाएँ तो!!!

माय गॉड.. शीला.. तेरा दिमाग क्या क्या सोच रहा है.. पर अगर ऐसा सॉफ्टवेयर मिल जाएँ तो तू किस पर इस्तेमाल करेगी? ऑफ कोर्स मदन पर.. उसके दिमाग में झांककर देखती की वहाँ विदेश में उसने कितनी गोरी रंडियों के भोसड़े गरम कीये है.. और वही सॉफ्टवेयर अगर मदन को मिल जाए तो क्या होगा.. !!! रसिक, रूखी, उसका ससुर, जीवा, रघु, पीयूष, पिंटू, चेतना, रेणुका, अनुमौसी, कविता.. बाप रे बाप.. मेरी तो शामत ही आ जाए.. और मदन बेचारा हार्ट अटेक से मर जाए.. अपनी सोच पर खुद ही हंसने लगी शीला

शीला को हँसते हुए देखकर संजय ने पूछा “किस बात पर हंस रही हो मम्मीजी?”

शीला: ऐसे ही.. कोई पुराना जोक याद आ गया था मुझे”

संजय: “मुझे भी तो सुनाओ वो जोक”

शीला: “तुम्हें सुनाने लायक नही है”

संजय शेतानी मुस्कान के साथ बोला “हम्म.. समझ गया मैं”

अभी १०० किलोमीटर का सफर भी तय नही हुआ था और संजय खुल के बात करने लगा था.. कमबख्त उस ड्राइवर ने भी कोई मलयालम गानों की डीवीडी लगाई थी.. भरे भरे स्तनों वाली एक साँवली अधनंगी हिरोइन उत्तेजक डांस कर रही थी.. उसका गदराया जिस्म देखकर शीला के भोसड़े में आग लग गई.. संजय एकटक उस हीरोइन के बॉल देख रहा था.. शीला ने एक बार मदन को शिकायत भी की थी.. की उनके दामाद की नजर ठीक नही थी.. जब भी आता था शीला की छाती को ही टकटकी लगाकर देखता रहता था.. तब बेशर्म मदन ने क्या कहा था वो शीला को आज भी याद था.. मदन ने कहा था.. अरे जानेमन, तेरे बबले है ही इतने कमाल के.. मुझे पक्का यकीन है.. संजय सिर्फ देखता ही नही है.. उन्हे याद करते हुए मूठ भी लगाता होगा

मदन की वो बात याद आते ही शीला शरमा गई.. क्या संजय अभी भी उसी नजर से देखता होगा मुझे? अब तो मेरी उम्र भी हो चली है.. और वैशाली के भी काफी बड़े बड़े है.. शायद इसलिए अब संजय को पहले जितनी दिलचस्पी न रही हो मेरी छातियों में.. उसे दिलचस्पी हो या न हो.. मुझे उससे क्या? मैं क्यों यह सब बेकार की बातों के बारे में सोचकर दिमाग खराब कर रही हूँ?

झुककर अपनी क्लीवेज दिखाते हुए नाच रही उस साउथ की हीरोइन के मदमस्त उरोजों को देखकर संजय की सिसकी निकल गई.. जो शीला ने भी सुनी.. अभी भी ये बेवकूफ पराई औरतों की छातियों में ही उलझा हुआ है.. मुझे भी मेरी छातियों को संभालकर रखना होगा.. कहीं ये चूतिया मौका देखकर दबा न दे.. इन सारे विचारों से शीला की पेन्टी गीली हो रही थी

शीला के मन मस्तिष्क और जिस्म पर हवस का सुरूर चढ़ रहा था लेकिन दामाद के साथ होने से कंट्रोल रखना भी जरूरी था.. संजय के अंदर शीला को दामाद नही.. पर एक जवान लंड नजर आने लगा.. वैसे भी संजय दामाद की तरह कहाँ पेश आ रहा था.. उसके हाव भाव और बोलने से तो यही लग रहा था जैसे वो शीला को चोदने के लिए गोवा ले जा रहा हो..

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संजय के पेंट में लंड वाला हिस्सा फूलकर कचौड़ी जैसा हो गया था.. जिस पर शीला की नजर बार बार चली जाती थी.. पेंट और अंडरवेर के आरपार शीला ने संजय के तने हुए सख्त लंड की मन में कल्पना भी कर ली थी.. ​

शीला की हवस अब तूफान का स्वरूप धारण कर चुकी थी.. एलसीडी के छोटे से स्क्रीन पर चल रहे द्रश्य इस तूफान को ओर हवा दे रहे थे.. और इस तूफान में, सास और दामाद के संबंधों की पवित्रता धीरे धीरे हवा बनकर उड़ जा रही थी.. जोर जोर से भारी सांसें लेने के कारण सील की छातियाँ ऊपर नीचे हो रही थी.. संजय की नजरें स्तनों की हलचल का रसपान कर रहे थे और अपने दामाद की कामुक नज़रों से शीला के संयम का बांध टूटता जा रहा था..

संजय ने धीरे से शीला की जांघ पर हाथ रख दिया.. शीला कांप गई.. ये जो कुछ भी हो रहा था वो गलत था ये जानते हुए भी शीला उसे रोक नही पाई.. वासना ने उसके हाथ बांध दिए थे.. उसका मन तो कर रहा था की संजय का हाथ हटा दे और गाड़ी से उतर जाए पर उसका शरीर उसे ऐसा करने से रोक रहा था..

थोड़ी देर तक जांघ पर हाथ रखने पर भी जब शीला ने कोई विरोध नही किया तब संजय को जैसे ग्रीन सिग्नल मिल गया.. हिम्मत करके उसने शीला का हाथ पकड़ लिया और उसे चूम लिया.. शीला के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई.. बेबस होकर वो संजय की हरकतों को देखती ही रही.. शीला की छोटी उंगली को संजय अपने मुंह में लेकर चूसने लगा.. उसकी जीभ के गरम स्पर्श से शीला ने कामुक होकर अपनी आँखें बंद कर दी.. और बंद आँखों में उसे आगे होने वाले द्रश्य दिखाई देने लगे..

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काफी देर तक संजय शीला के हाथों से खेलता रहा.. कोई जल्दी तो थी नही क्योंकि सफर लंबा था.. शीला की गोरी नाजुक कोमल हथेली के बीच अपनी जीभ ऐसे फेरने लगा जैसे शीला का भोसड़ा चाट रहा हो.. शीला मन ही मन सोच रही थी.. ये आदमी कितना खतरनाक है.. कितनी कामुक हरकतें कर रहा है.. !! कोई भी औरत चाहे कितनी भी चारित्रवान क्यों न हो.. ऐसे स्पर्श का आगे कितनी देर तक संयम रख सकती थी.. !! शीला की चुत में जबरदस्त झटके लग रहे थे.. सिर्फ उसकी हथेली से खेलते हुए संजय ने उसे बेहद गरम कर दिया था.. शीला तब चोंक गई जब संजय ने उसकी हथेली अपने लंड पर रख दी..

शीला के शरीर में हाहाकार मच गया.. दोनों के बीच जो पतली सी रेखा बची थी वो भी जैसे मिट चुकी थी.. शीला का पल्लू अपनेआप सरक कर नीचे गिर गया.. क्या उत्तेजना के कारण पल्लू गिर गया? शीला के स्तन इतने कडक हो गए की उसे डर लगने लगा.. कहीं ब्रा के हुक टूट न जाए.. !! शीला के अंग अंग में उत्तेजना का जहर फैलने लगा था.. अपने सगे दामाद के लंड पर रखा हुआ हाथ.. पेंट के अंदर छुपे हुए उस विकराल लंड के झटकों के साथ ऊपर नीचे हो रहा था.. लंड की गर्मी शीला की हथेली से होते हुए उसकी चूत तक पहुँच रही थी..

हथेली में महसूस हो रही गर्मी को अपनी भोस के वर्टीकल होंठों के अंदर अनुभवित करने के लिए ऊपर नीचे हो रही थी शीला.. अनजाने में उसने संजय के लंड के उभार को दबा दिया.. संजय की आँखों में जोरदार चमक आ गई.. पल्लू सरकने के बाद, हिमालय के उत्तुंग शिखरों जैसे उसके बड़े बड़े स्तनों की गोलाइओ को छूने का बड़ा मन कर रहा था संजय को.. लेकिन वह जल्दबाजी करना नही चाहता था.. इस तरफ शीला सोच रही थी की लंड पकड़ लिया है.. पर अब तक संजय उसके स्तनों को क्यों नही छु रहा है !!

संजय के लंड पर शीला की पकड़ धीरे धीरे मजबूत होती जा रही थी.. शरीर की आग इतनी भड़क गई की शीला ने खुद ही संजय का हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिया.. पुरुष के हाथों का स्पर्श.. स्तनों पर कितना अच्छा लगता है यह केवल स्त्री ही जानती है..

फट.. एक आवाज हुई और शीला के ब्लाउस का एक हुक टूट गया.. टाइट स्तनों के कारण ही हुक टूट गया था.. हुक टूट जाने से स्तनों पर दबाव थोड़ा सा कम हो गया.. संजय ने शीला की ओर देखा.. और वो शरमा गई.. शर्म आनी स्वाभाविक भी थी.. सास का हाथ दामाद के लंड पर हो और उसका हाथ सास के स्तनों पर.. संजय थोड़ा सा करीब आ गया शीला के.. ड्राइवर और पेसेन्जर के बीच एक काला पर्दा था.. जो संजय ने खींचकर आधा बंद कर दिया

पर्दा थोड़ा सा बंद होते ही पता नही शीला को क्या हो गया.. उसने संजय के लंड को अपनी मुठ्ठी में मसल दिया.. और उतने ही जोर से संजय ने शीला के स्तनों को ब्लाउस के ऊपर से दबा दिया.. दोनों सीट के कोने में, परदे के पीछे ऐसे सट गए थे की ड्राइवर को कुछ भी नजर न आए.. संजय ने शीला के चेहरे को पकड़कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए.. शीला संजय से भी अधिक आक्रामक होकर उसे चूमने लगी..

संजय: “मम्मी जी, प्लीज जल्दी जल्दी अपने ब्लाउस के हुक खोलकर आपके स्तन बाहर निकालो.. कितने सालों से अपने मन में ही उन्हे नंगे देख रहा हूँ.. आज मेरा वो सपना साकार कर ही दो.. प्लीज.. !!”

शीला: “यहाँ नही.. ड्राइवर देख लेगा तो ??”

संजय: “अरे मम्मी जी.. ड्राइवर रोड देखेगा या पीछे देखेगा..!! जल्दी करो मम्मीजी.. मुझसे रहा नही जा रहा” कहते हुए संजय ने बेरहमी से शीला की चूचियाँ मसल दी.. शीला के कंठ से धीमी चीख निकल गई..

शीला: “क्या कर रहे हो? मुझे दर्द होने लगा.. ऐसे भी कोई करता है क्या !!!”

संजय: “मम्मी जी प्लीज.. अभी के अभी अगर आपने हुक नही खोले तो मेरी जान निकल जाएगी.. मैं अब एक पल के लिए भी सब्र नही कर सकता.. “

उस दौरान शीला ने पेंट की चैन खोलकर अंदर हाथ डाल दिया था.. पेंट की मोटी परत दूर होते ही शीला बस एक कदम दूर थी उस नंगे लंड को अपने हाथों में पकड़ने के.. संजय ने फिर से शीला को खींचकर उसके होंठों को चूस लिया.. जवाबी हमले में शीला ने संजय के अंडरवेर में हाथ डालकर उसका लंड पकड़ लिया और बोली “आह्ह संजय बेटा.. कितना टाइट हो गया है !!”

दोनों उत्तेजना की नई सीमाएं पार करते जा रहे थे.. संजय ने शीला के ब्लाउस के दो हुक जबरदस्त खुलवा दिए.. उसके दूध जैसे गोरे मदमस्त स्तन की आधे से ज्यादा गोलाई बाहर झलकने लगी.. ऐसा लग रहा था जैसे बादलों से चाँद बाहर झांक रहा हो.. संजय के लंड पर शीला की पकड़ मजबूत होती जा रही थी.. शीला की सारी शर्म, वासना की आग में जलकर खाक हो चुकी थी.. ​

शीला के आदर्श भारतीय नारी के चोले के नीचे एक अति कामुक और थोड़ी सी विकृत स्त्री छुपी हुई थी.. जो बेहद वासना युक्त.. बार बार उत्तेजित होने वाली निम्फोमैनीऐक थी.. हमेशा चुदने के लिए तैयार.. दिन में न जाने कितनी बार उसकी चूत उत्तेजित हो जाती थी.. वासना के कारण शीला को इतने गंदे गंदे विचार आते थे की बात ही मत पूछो

संजय के कठोर लंड को बाहर निकालकर शीला ने मन भरकर देखा.. गोरा गुलाबी लंड था उसके दामाद का.. लाल लाल सुपाड़ा और लंड पर उभरी हुई मोटी नसें.. शीला के हाथों में थिरक रहा था संजय का लंड.. रसिक या जीवा के मुकाबले कद में छोटा पर अच्छा खासा मोटा था उसका लंड.. ऐसे कड़े लंड को देखते ही शीला बेकाबू हो गई.. मुठ्ठी में पकड़कर उत्तेजनापूर्वक वह लंड की त्वचा को आगे पीछे करने लगी.. और ड्राइवर न सुन सके ऐसी धीमी आवाज में संजय के कान में बोली.. “देखने के बाद अब रहा नही जा रहा.. चूसने का मन कर रहा है बेटा”​

“तो देर किस बात की है मम्मी जी.. ले लीजिए मुंह में और मेरी बरसों की तमन्ना को आज पूरा कर दीजिए.. वैसे कैसा लगा ये आपको?”

“अरे मस्त है बेटा.. थोड़ा सा छोटा है पर मोटा है.. मज़ा आएगा.. अभी इतनी छोटी सी जगह में चूसने में मज़ा नही आएगा.. फिर मौका मिलें तब देखेंगे”

आधे बाहर लटक रहे स्तनों को संजय पूरी उत्तेजना से मसल रहा था.. शीला की छाती.. उफ्फ़ उसके मदमस्त चूचियाँ.. कितना तड़प रहा था वो इन्हे नंगा देखने के लिए.. सासुमाँ के नग्न स्तनों को देखने के लिए उसने एक बार बाथरूम में झाँकने की कोशिश की थी पर वैशाली ने उसे पकड़ लिया था.. उसके बाद कितने दिनों तक वैशाली ने उससे बात तक नही की थी..

शीला: “संजय बेटा.. तेरा हाथ बहोत गरम लग रहा है मुझे.. उफ्फ़.. मुझे कुछ कुछ हो रहा है.. आह्ह !!”

संजय: “मम्मी जी, आप बहोत मस्त हो.. आपको देखकर मेरा लंड झटके खा रहा है.. आपके हाथ में ये जितना सख्त हो गया है उतना तो आज से पहले कभी नही हुआ.. क्या कयामत है आपकी चूचियाँ.. वाह !!! दिल करता है की पूरा दिन बस इनसे खेलता ही रहूँ.. उफ्फ़ मम्मी जी.. मुझे इन्हें चूसने का बहोत मन कर रहा है.. आप पूरे बाहर निकाल दीजिए.. दोनों बाहर न निकले तो न सही.. एक तरफ का ही निकाल दो.. मैं एक को चूस लूँगा.. बस थोड़ी ही देर के लिए मम्मीजी.. प्लीज.. !!”

शीला: “ओह्ह संजय बेटा.. खुले रोड पर ऐसा करना खतरनाक हो सकता है.. कोई देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी”

संजय: “इतनी तेज चल रही है कार.. कौन देख लेगा.. चलती हुई गाड़ी में ऐसा करने में बहोत मज़ा आएगा आपको भी.. देखो तो मेरा लंड पागल सा हो रहा है.. एक तरफ मुझे बेटा बेटा कहकर बुलाती हो.. और आपका दूध तो चूसने नही दे रही.. ऐसा कैसे चलेगा!!” शीला के स्तनों को दोनों हाथों से दबाते हुए संजय ने कहा

शीला ने चारों तरफ देखकर सब-सलामत की तसल्ली कर ली.. और ब्लाउस की एक तरफ की कटोरी को ऊंचा कर के.. अपनी ४८ के साइज़ की एक चुची बाहर निकाली.. पूर्णिमा के चाँद जैसा उसका स्तन चमकने लगा.. संजय के दिल की धड़कने जैसे रुक सी गई.. थोड़ी देर के लिए वह शीला के अनमोल स्तन को देखता ही रह गया.. शीला और मजबूती से संजय का लंड हिलाने लगी.. ​

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“ओह्ह बेटा.. अब ईसे देखता ही रहेगा या कुछ करेगा भी.. !!! देख ना.. मेरी निप्पल कितनी सख्त हो गई है.. चूस ले जल्दी जल्दी”

शीला के इतना कहते ही “ओह्ह मम्मी जी” कहते हुए संजय ने अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.. उसकी उत्तेजना देखकर हतप्रभ हो गई शीला.. बिना चूसे या चूत में घुसे ही लंड पिचकारी छोड़ देगा ऐसा अंदाजा नहीं था शीला को.. अपने लंड की इस हरकत से संजय शरमाकर रह गया.. जैसे उसकी मर्दानगी पर दाग लग गया हो.. वो भी क्या करता.. शीला के नंगे चुचे का जादू ही कुछ ऐसा था.. अच्छे अच्छों का देखते ही पानी निकाल दे !!​

शीला संजय की परिस्थिति समझ रही थी.. उसने संजय का हाथ अपने खुले स्तन पर रखते हुए कहा “संजय, तेरे लंड में कितना वीर्य भरा हुआ है?? अभी से छलकने लगा “

संजय झुककर शीला की गोद में सर रखकर लेट गया.. और छोटे बच्चे की तरह बच-बच आवाज करते हुए शीला की निप्पल चूसने लगा.. जितना वो चूसता गया उतना उसका लंड खड़ा होता गया.. जैसे वो शीला की निप्पल से एनर्जी ड्रिंक चूस रहा हो.. लंड फिर से खड़ा हो गया.. नए सिरे से सख्त हुए लंड को देखकर शीला के भोसड़े को चुदने की आशा जगी..

फिर से टाइट होकर उछल रहे लंड को पकड़ कर शीला झुकी और एक किस कर दिया उसने लाल टोपे पर.. शीला के होंठों का स्पर्श होते ही संजय का लंड ओर खिल उठा.. और ज्यादा सख्त होकर अप-डाउन करने लगा.. शीला के स्तन भी टाइट होकर लाल हो चुके थे.. वह झुककर लंड को चूस रही थी और उसका बाहर लटक रहा स्तन संजय की जांघ पर रगड़ रहा था.. नरम नरम स्तन को अपनी जांघ पर घिसता देख संजय सातवे आसमान पर उड़ने लगा.. हाथ नीचे डालकर वह शीला के स्तन को मींजने लगा॥ ​

शीला आँखें बंद कर अपने दामाद का लंड कुल्फी की तरह चूस रही थी.. मुंह से ढेर सारी लार निकालते हुए जब काफी देर तक चूसने के बाद उसने लंड को मुंह से बाहर निकाला तब उसका गोरा लंड ऐसा लग रहा था जैसे अभी नहाकर बच्चा बाथरूम से बाहर भीगा हुआ निकला हो.. इतना सुंदर लग रहा था वह टाइट लंड.. शीला को देखते ही प्यार आ गया.. वह फिर से चूसने लगी.. आधा घंटा होने को आया लेकिन शीला लंड को छोड़ने का नाम ही नही ले रही थी.. संजय बड़े ही ताज्जुब से अपनी सास की हवस को देखता रहा.. उसे आश्चर्य हो रहा था.. कितनी देर से मम्मी जी लंड चूस रही है? थक ही नही रही.. !!! गज़क की पागल है ये तो मेरे लोडे के लिए.. बाकी सारी लड़कियां और औरतें तो एक मिनट के लिए मुंह में लेने में भी कितने नखरे करती है!!! पर ये तो बिना कहे बस चूसती ही जा रही है..

आखिर शीला थक गई पर फिर भी उसने लंड मुंह से बाहर नही निकला.. मुंह में लंड रखकर ही वह पड़ी रही.. थोड़ी मिनटों के लिए रीलैक्स होकर वह वापिस चूसना चालू कर देती.. दोनों में से कोई कुछ भी नही बोल रहा था.. क्या बोलते? और क्यों बोलते? जब लंड और चूत बात कर रहे हो तब शब्दों की जरूरत ही कहाँ पड़ती है.. !!

अपनी उत्तेजना को किसी भी किंमत पर शांत करने के मनसूबे से शीला लंड को थन की तरह चूस रही थी.. संजय नीचे हाथ डालकर शीला के बाएं स्तन को जोर जोर से दबा रहा था.. शीला अपनी जीभ का ऐसा कमाल दिखा रही थी की संजय कराह उठता और जोर से शीला का स्तन दबा देता.. संजय को आश्चर्य इस बात का था की इतनी जोर जोर से चुची दबाने पर भी शीला के मुंह से एक उफ्फ़ तक नही निकलती थी.. क्या मम्मी जी को दर्द नही होता??​

शीला को दर्द हो रहा हो या ना हो.. पर संजय का लंड अब दुखने लगा था.. एक बार झड़ने के बाद फिर से सख्त हुए लंड को अब ४५ मिनट से शीला चूसे जा रही थी.. थकने का नाम ही नहीं ले रही थी.. संजय अब तक शीला की चूत तक पहुँच नही पाया था.. उसने एक दो बार घाघरे में हाथ डालने की कोशिश तो की थी पर शीला ने उसे रोकते हुए समझाया था की अभी फिलहाल गाड़ी के अंदर वह उसका लंड चूत में नही ले पाएगी.. शीला इसलिए भी मना कर रही थी क्योंकि उसे पता था की एक बार अगर संजय ने उसके भोसड़े को छु लिया.. फिर वह आपे से बाहर हो जाएगी..

शीला को इतनी कामुकता से लंड चूसते देखकर संजय हतप्रभ था.. कौन किसको इस्तेमाल कर रहा है इसका पता ही नही चल रहा था.. सामान्यतः पुरुष ही स्त्री को अपनी इच्छा अनुसार भोगता है.. पर यहाँ तो शीला ही संजय के लंड के भोग का मज़ा ले रही थी.. मस्ती में चूस रही शीला कभी कभी इतनी उत्तेजित हो जाती की अपने दांतों से संजय के सुपाड़े को हल्के से काट लेती.. संजय डर गया.. कहीं हवस के मारे वह उसका लंड खा न जाए.. अगर ऐसा हुआ तो अखबार में कैसी हेडलाइन्स छपेगी.. !! “हवस में अंध सास ने अपने दामाद का ही गुप्तांग काट खाया”

संजय: “मम्मी जी, प्लीज.. अब बस भी कीजिए.. मेरा फिर से निकल जाएगा॥” पर संजय की यह बात शीला के कानों पर जैसे पड़ी ही नही थी.. उसने संजय की तरफ देखा तक नही.. ऊपर से अपनी मुठ्ठी में आँड़ों को ऐसे दबा दिया की संजय दर्द के मारे सीट के ऊपर १ फुट उछल गया.. संजय के ऊपर होते ही शीला ने एक हाथ नीचे डाला और संजय की गांड में अपना अंगूठा घोंप दिया..

“मम्मी जी.. ओह्ह गॉड.. ” कहते हुए संजय के लंड से गरम चिपचिपा वीर्य शीला के मुंह में रिसने लगा.. शीला इतनी जोश में थी की पिचकारी निकलते ही पी जाती.. लंड ने तीन से चार पिचकारियाँ छोड़ी और शीला ने एक बूंद भी नही छोड़ी.. लाल टोपे को चाट चाट कर शीला ने साफ कर दिया.. बिना मुंह बिगाड़े या किसी घिन के वीर्य को चाट रही अपनी सास को देखकर संजय हक्का-बक्का रह गया.. उसने आज तक कितनी लड़कियों और औरतों के साथ बिस्तर गरम किया था.. लेकिन इतनी कामुक औरत का सामना आज तक उसे कभी नही हुआ था.. ​

आखिर जब शीला ने लंड को मुंह से निकाला तब वह बेजान मुर्दे की तरह गिर गया.. शीला के चेहरे पर विजय की मुस्कान थी.. और संजय के चेहरे पर तृप्तता के भाव थे.. दोनों कुछ देर तक वैसे ही बैठे रहे.. शीला का बायाँ स्तन अभी भी बाहर था.. और संजय का लंड बेजान होकर सो रहा था.. शीला ने झुककर एक आखिरी बार उस निर्जीव लंड को चूमा.. और उसे पेंट के अंदर डालकर चैन बंद कर दी.. संजय ने अपने शर्ट के बटन बंद कीये और अपने बाल भी ठीक कर लिये.. शीला ने भी अपना घाघरा ठीक करते हुए अपनी चुत को सहलाया.. कामरस से गीली चुत में दो उँगलियाँ डालकर वह उँगलियाँ संजय के नाक के पास ले गई.. अपने भोसड़े की गंध सुँघाते हुए वह धीमे से बोली “सूंघ कर बताओ बेटा.. किसके जैसी गंध आ रही है? वैशाली जैसी या फिर…. चेतना जैसी ???”

चेतना का नाम सुनते ही संजय के होश उड़ गए.. साला ये NEET की तरह मेरा पेपर किसने लीक कर दिया? जरूर चेतना ने ही बताया होगा.. संजय को सोच में पड़ा हुआ देख.. शीला ने अपनी गीली उंगलियों को संजय के गालों पर और होंठों पर रगड़कर उसके मुंह में डाल दिया.. और बोली “अभी तुम चाट तो नही पाओगे.. पर स्वाद तो चख लो.. “

To Be Continue…..

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