अगले दस मिनट में शीला रूखी के घर के बाहर खड़ी थी.. उसने धीरे से दरवाजा खोला.. रूखी का मिसकोल अभी आया नहीं था.. पर शीला से रहा ही नहीं जा रहा था.. मुख्य कमरे से गुजरते हुए वह दूसरे कमरे के दरवाजे के पीछे सटकर अंदर का नजारा देखने की कोशिश करने लगी.. अंदर का द्रश्य देखकर शीला के भोसड़े में १०००० वॉल्ट का झटका लगा..
रूखी का ससुर और रूखी दोनों ही खटिया पर नंगे थे.. वो बूढ़ा रूखी के मदमस्त बबले पकड़कर दबाते हुए रूखी से कुछ बात कर रहा था.. रूखी धोती के ऊपर से अपने ससुर के लंड से खेल रही थी.. दोनों सारी लाज-शर्म त्याग चुके थे.. रूखी ने ससुर को अपने ऊपर खींच लिया और बाहों में दबा दिया..
ससुर: “अरे बहु.. दरवाजा तो ठीक से बंद कर लेती.. बड़ी जल्दी है तुझे तो.. रुक.. मुझे दरवाजा बंद करने दे.. ” वो उठकर दरवाजा बंद करने आया.. शीला साइड में छुप गई.. उसी वक्त रूखी ने शीला को मिसकोल किया.. शीला को यकीन था की जैसे ही बूढ़ा खटिया पर लेटेगा, रूखी किसी न किसी बहाने से दरवाजा खोल ही देगी..
रूखी: “बाबूजी, मैं जरा पानी पीकर आती हूँ” पानी पीने के बहाने वो उठी और उसने दरवाजे की कुंडी खोल दी.. और फिर ससुर के साथ खटिया में लेट गई..
रूखी: “बाबूजी, दरवाजे की कुंडी खराब हो गई है.. ठीक से बंद ही नहीं होती.. कोई जोर से धक्का दे तो भी खुल जाती है.. उसे ठीक करवा दीजिए”
रूखी के ५-५ किलो को चुचे दबाते हुए बूढ़ा बोला “अरे जो होगा देखा जाएगा बेटा.. अभी यहाँ कौन आने वाला है.. आह्ह रूखी बेटा.. ये तेरा जोबन.. वाहह.. देख तो.. कितना कडक हो गया मेरा.. जवानी में भी ऐसा सख्त नहीं होता था.. क्या जादू है तेरे जोबन का मेरी बहुरानी.. !!”
काले नाग की तरह खड़ा होकर फुँकार रहा था बूढ़े का लंड.. रूखी ने अपने हाथों से भेस के थन की तरह ससुर का लंड पकड़ा.. उसे ऐसा लगा मानों लोहे का गरम सरिया हाथ में ले लिया हो.. शीला को अब तक दरवाजा खोलकर अंदर आ जाना चाहिए था पर वह भी इस बूढ़े का लंड देखती ही रह गई..
ससुर: “बहु.. तू बड़ा मस्त चूसती है.. चल मुंह में लेकर चूस दे.. ” रूखी ने ससुर के लंड का सुपाड़ा मुँह में लिया ही था की तभी..
“रूखी घर में है???” शीला बाहर से चिल्लाई.. और दरवाजे को धक्का देकर अंदर चली आई
“अरे बाप रे.. !!” ससुर ने बस इतना ही कहा.. वह आजू बाजू चादर ढूँढने लगा.. पर रूखी का आयोजन एकदम सटीक था..सारे कपड़े उसने दूर रख दिए था.. थोड़ी सी दूरी से शीला को बूढ़े का झांटों से भरा हुआ खूँटे जैसा लंड दिखने लगा.. शीला ने शर्माने की एक्टिंग की और बोली
शीला: “हाय माँ.. ये क्या कर रही है तू रूखी?? कुछ शर्म हया है या नहीं तुझे?? अपने सगे ससुर के साथ ही..!!!! “
रूखी: “अरे भाभी.. आप यहाँ? फोन करके आना चाहिए था आपको.. “
बूढ़े के हाथ अभी भी रूखी के स्तनों पर ही थे.. उसका दिमाग काम ही नहीं कर रहा था.. वह स्तब्ध होकर शीला की ओर देख रहा था.. रूखी तो एक्टिंग कर रही थी.. पर बूढ़े की गांड फटकार दरवाजा हो गई थी..
शीला: “हाँ.. अब तो मुझे भी लगता है की फोन करके ही आना चाहिए था.. आप लोगों के रंग में भंग तो नहीं पड़ता.. !!”
रूखी: “भाभी आप रसोईघर में जाइए.. मैं आती हूँ अभी”
शीला: “नहीं रूखी.. मैं अब यहाँ एक पल भी नहीं रुकने वाली” शीला वापिस चलने लगी
ससुर: “अरे एक मिनट.. मेरी बात तो सुनिए आप.. !!” शीला रुक गई तो ससुर आगे बोला “आप कृपा करके किसीको ये बात मत बताना.. वरना हमारी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी” दो हाथ जोड़कर नंगे खड़े ससुर ने शीला से विनती की.. शीला शर्मा गई.. आँखें झुकाकर शीला उस बूढ़े के लटक रहे लंबे लंड को निहार रही थी.. पहले के मुकाबले लंड सिकुड़ चुका था.. डर के कारण.. रूखी का नंगा जिस्म इतना सेक्सी लग रहा था की देखते ही शीला को कुछ होने लगा.. बेचारे ससुर का क्या दोष?
शीला को अपने लंड को तांकते देख बूढ़ा दौड़कर अपनी धोती ले आया.. और कमर पर जैसे तैसे बांध ली.. खटिया पर बैठकर उसने रूखी की ओर देखा और बोला
ससुर: “बहु, तुम अपनी सहेली को जरा समझाओ.. ये अगर किसी को बता देगी तो हम किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं बचेंगे”
रूखी ने इशारा कर अपने ससुर को चुप रहने के लिए बताया.. फिर वो शीला के पास आई और उसे कोने में ले जाकर बोली
रूखी: “भाभी अब क्या करना है.. ? आपने जैसा कहा था वैसा ही मैंने किया.. “
शीला ने रूखी के कान में कहा “तेरे ससुर को समझा की अगर ईसे चुप करवाना हो तो किसी भी तरह हमारे साथ शामिल करना पड़ेगा.. मैं मना करती रहूँगी.. पर तुम दोनों अड़े रहना.. “
रूखी अपने ससुर के पास आई और शीला सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गई.. रूखी ने अपने ससुर को वैसे ही समझाया.. ससुर थोड़ा सा झिझक रहा था पर मानने के अलावा ओर कोई चारा भी तो नहीं था.. आखिर इज्जत का सवाल था.. एक बुरे काम को छुपाने के लिए ओर दस बुरे काम करने पड़ते है..
बूढ़ा खड़ा हुआ.. और कुर्सी के पीछे जाकर शीला से लिपट कर उसके स्तन मसलने लग गया
शीला घबराने का अभिनय करते हुए “अरे ये क्या कर रहे है आप?? आपकी बेटी की उम्र की हूँ मैं.. कुछ शर्म है की नहीं आपको.. रूखी जरा समझा इनको”
ससुर ने शीला की निप्पलों को ब्लाउस के ऊपर से ही मरोड़ते हुए कहा ” बाप जैसा हूँ.. पर बाप तो नहीं हूँ ना.. तू भी एक बार चुदवा ले.. फिर देख.. रोज मेरे पास आएगी.. तू भी रूखी से कम नहीं है.. आह्ह” शीला के दोनों पपीतों को हथेलियों से सहलाते हुए बूढ़ा बोला
शीला: “छोड़ दीजिए मुझे वरना मैं चिल्लाऊँगी” शीला ने अपने आप को छुड़वाने की नाकाम कोशिश की
अब रूखी करीब आई और उसने शीला का पल्लू हटा लिया और बोली
रूखी: “उन्हे कर लेने दीजिए भाभी.. आपके छेद में थोड़ा सा अंदर बाहर कर लेंगे उसमें आपका क्या बिगड़ जाएगा?? वैसे भी आपके पति है नहीं.. आपको भी थोड़ा सा मज़ा मिल जाएगा.. बाबूजी आप कीजिए.. मैं भी देखती हूँ कैसे मना करती है ये”
छूटने के लिए शीला जानबूझकर कमजोर प्रयास कर रही थी.. और रूखी का ससुर शीला पर टूट पड़ा.. पर हुआ यह की इस सारी घटना के कारण बुढ़ऊ का लंड खड़ा ही नहीं हो पा रहा था.. अपने ससुर का मुरझाया लंड देखकर रूखी बोली
“ईसे खड़ा तो कीजिए बाबूजी.. !!! वरना आप भाभी को कैसे चोदोगे?”
ससुर: “तुझे पता तो है बहु.. बिना चूसे ये खड़ा ही नहीं होता.. और इन्हे देखकर ये शर्मा गया है.. इनसे कहो की ये ही कुछ करे ईसे जगाने के लिए”
शीला का हाथ पकड़कर रूखी ने बूढ़े ससुर के लंड पर रख दिया.. शीला शर्माने का नाटक करने लगी.. “ये सब ठीक नहीं हो रहा रूखी.. किसी को पता चल गया तो?”
रूखी ने शीला के ब्लाउस के हुक खोल दिए और ब्रा ऊपर कर दी.. दोनों पपीते बाहर झूलने लगे.. शीला के मदमस्त चुचे देखते ही बूढ़े के लंड में जान आने लगी.. थोड़ी ही देर में उस सुस्त लंड ने घातक स्वरूप धारण कर लिया
रूखी घुटनों के बल बैठ गई और शीला के हाथ से लंड ले लिया.. और चटकारे लेकर चूसने लगी.. बूढ़ा शीला के स्तनों को मसले जा रहा था.. थोड़ी देर लंड चूसकर रूखी खड़ी हो गई.. और बोली “बाबूजी, भाभी की चुत चाटिए.. तो वो जल्दी मान जाएगी.. जैसे मेरी चाटते हो बिल्कुल वैसे ही चाटना.. ” शीला के घाघरे का नाड़ा खींच लिया रूखी ने
ससुर: “अच्छा ऐसी बात है.. तो अभी मना लेता हूँ ईसे.. “
घाघरा उतरते ही मदमस्त हथनी जैसी जांघों के बीच बिना बालों वाली रसीली चूत को एकटक देखने लगा बूढ़ा.. रूखी ने शीला के भोसड़े के दोनों होंठ अपनी उंगलियों से चौड़े कीये.. और अंदर का गुलाब सौन्दर्य दिखाने लगी अपने ससुर को.. रूखी का ससुर उकड़ूँ बैठकर शीला की चूत के करीब आया.. पहले तो उसने चूत को प्यार से चूमा.. शीला की सिसकी निकल गई.. “आआआआह्ह.. !!!”
रूखी ने हस्तक्षेप किया.. शीला का हाथ पकड़कर उसे खटिया पर लिटा दिया.. ससुर भी कूदकर शीला की दोनों जांघों के बीच बैठ गया.. रूखी ने शीला की कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया.. बूढ़े ने शीला के भोसड़े को अब बड़ी ही मस्ती से चाटना शुरू कर दिया..
अब रूखी और शीला दोनों निश्चिंत हो गए.. सब कुछ प्लान के मुताबिक हो रहा था.. शीला ने बूढ़े का सर अपने दोनों हाथों से पकड़कर चूत पर दबा दिया..
शीला: “आह्ह रूखी.. तेरा ससुर क्या मस्त चाटता है.. ऊई.. ओह्ह.. अमममम.. !!”
रूखी अपने दोनों पैर शीला के चेहरे के इर्दगिर्द जमाकर बैठ गई और अपनी झांटेदायर चुत को शीला के नाके के साथ रगड़ने लगी..
शीला: “उफ्फ़ रूखी.. तू ये बाल साफ क्यों नहीं करती? जंगल जैसा हो गया है पूरा”
शीला के स्तनों को अपने कूल्हों से रगड़ते हुए रूखी ने कहा “भाभी, बाबूजी को झांटों वाली पसंद है इसलिए.. “
बूढ़ा चाटते हुए बोला “वैसे बिना बालों वाली भी बहोत सुंदर लगती है.. ” वो फिर से शीला के भोसड़े की गहराइयों में खो गया.. उसका लंड अभी भी लटक रहा था.. शीला ने आखिर रूखी की लकीर में अपनी जीभ घुसा ही दी.. साथ ही साथ वो रूखी के मटके जैसे बड़े स्तनों को दबा रही थी.. बूढ़े की जीभ उसके भोसड़े में ऐसा कहर ढा रही थी.. शीला उत्तेजित होकर रूखी की चूत चाट रही थी.. काफी देर तक ये सिलसिला चलता रहा
फिर रूखी शीला के ऊपर से उतर गई.. और अपने ससुर के सर के बाल खींचकर उन्हे शीला की चूत से अलग किया
रूखी: “क्या बाबूजी.. आपको नई वाली मिल गई तो मुझे भूल गए? मेरी भी चाटिए ना.. “
ससुर: “अरे बहु.. तुम्हारी तो रोज चाटता हूँ.. आज मेहमान आए है तो पहले उन्हे तो खुश करने दो.. ” रूखी ने एक ना सुनी और ससुर का चेहरा खींचकर अपनी चूत पर लगा दिया.. शीला उठकर बूढ़े के लंड को सहलाने लगी.. रूखी की चुत थोड़ी देर चूसकर वह बूढ़ा फिर से शीला की ओर बढ़ा.. शीला की गोरी लचकदार चूचियों के ऊपर टूट पड़ा.. उन मदमस्त उरोजों को वह दोनों हाथों से मसलने लगा.. शीला उस बूढ़े के खड़े लंड की चमड़ी आगे पीछे कर रही थी.. बूढ़े ने उंगली और अंगूठे के बीच शीला की निप्पल को दबा दिया.. शीला की चीख निकल गई.. उसने बूढ़े को धक्का देकर खटिया पर सुला दिया और उसके लंड को मस्ती से चूसने लग गई
रूखी अपने ससुर के मुंह पर सवार हो गई.. ससुर अपनी बहु की चुत चाट रहा था और शीला उसका लंड चूस रही थी.. शीला का चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था.. थोड़ा सा चूसने के बाद शीला से ओर रहा नहीं गया.. उसने अपने चूत के होंठ फैलाए और बूढ़े के लंड के ऊपर बैठ गई..
ऊपर नीचे करते हुए उसने गति बढ़ाई.. बूढ़े के मुंह पर रूखी की चूत थी और लंड पर शीला चढ़ी हुई थी.. थोड़ी देर कूदने पर ही शीला की चूत ने पानी छोड़ दिया.. भोसड़ा एकदम सिकुड़ गया.. और उसके अंदर फंसे लंड का गला घोंट दिया.. बूढ़ा ससुर भी आनंद से कराहने लगा..
शीला: “बहोत मज़ा आ रहा है आह्ह आह्ह आह्ह” अपने स्तन दबाते हुए वह अब अभी आखिरी धक्के लगा रही थी
रूखी के चुत ने भी रस छोड़ दिया.. अपनी जीभ और लंड से उस बूढ़े ससुर ने दो दो औरतों को एक साथ तृप्त कर दिया था.. सिसकियाँ भरते हुए रूखी अपनी चुत के होंठ ससुर के मुंह पर रगड़े जा रही थी.. स्खलित होते हुए वह कराह रही थी.. उसके ससुर ने रूखी के स्तनों को इतनी जोर से दबाया की दूध की पिचकारी से उनका पूरा सर गीला हो गया.. शीला ठंडी होकर नीचे उतर गई.. बूढ़े ने अब रूखी को लेटाया और उसपर सवार होकर धक्के लगाने लगा.. थोड़े ही धक्कों के बाद बूढ़ा आउट हो गया.. पर आउट होने से पहले उसने रूखी की चुत से एक बार ओर पानी निकाल दिया.. ध्वस्त होकर वो रूखी के बड़े बड़े स्तनों के बीच गिर गया.. और वहीं पड़ा रहा
थोड़ी देर वैसे ही खटिया में पड़े रहने के बाद सबसे पहले शीला खड़ी हुई.. बूढ़े ससुर के लंड पर आभार-सूचक किस करते हुए उसके लाल टोपे पर अपनी जीभ फेर दी.. सुपाड़े की नोक पर लगी वीर्य की बूंद को भी चख लिया.. लंड ने एक बार ठुमक कर शीला को सलामी दी..
अपनी बहु के स्तनों से खेलते हुए बूढ़े ने कहा “मज़ा आया तुम दोनों को?”
रूखी: “मुझे तो बहोत मज़ा आया.. आप शीला भाभी से पूछिए.. ” रूखी उठकर ब्लाउस पहनने लगी.. उस दौरान शीला अपने कपड़े पहन चूकी थी..
रूखी: “आप साड़ी में कितनी खूबसूरत लगती हो भाभी!!! कितना मस्त शरीर है आपका.. एकदम भरा हुआ.. ठीक कहा न मैंने बाबूजी” आखिरी हुक को बड़ी ही मुश्किल से बंद करते हुए रूखी ने कहा.. शीला रूखी के बड़े स्तनों को बस देखती ही रही.. उसकी चूत में नए सिरे से चुनचुनी होने लगी..
शीला: “रुखी, मुझसे तो कहीं ज्यादा तुम सुंदर हो.. तुझे पता नहीं है.. अगर फेशनेबल कपड़े पहनकर बाहर निकले तो लोग मूठ मार मारकर मार जाए.. अब मुझे चलना चाहिए.. काफी देर हो गई.. चलिए बाबूजी, मैं चलती हूँ.. फिर कभी आऊँगी.. मुझे भी अपनी बहु ही समझिए आप.. सिर्फ रूखी बहु का ही नहीं.. अब से आपको शीला बहु का भी ध्यान रखना होगा”
ससुर: “हाँ हाँ बहु रानी.. जब मन करें तब चली आना.. मैं तैयार हो आपको खुश करने के लिए”
शीला: “रूखी, तू मेरे घर पर आकर मुझे मिल.. मेरे पति कुछ दिनों में वापिस लौट आएंगे.. उससे पहले मिलने आ जाना”
रूखी: “हाँ भाभी.. जरूर आऊँगी”
अपना भोसड़ा ठंडा कर शीला वहाँ से घर की ओर निकल गई.. उसके चेहरे पर संतोष और तृप्तता के भाव थे.. घर पहुँचने की उसे कोई जल्दी नहीं थी.. इसलिए रिक्शा लेने के बजाए वह चलने लगी..
अपने कूल्हें मटकाते हुई शीला रास्ते पर चलती जा रही थी.. बड़े बड़े स्तन, गदराया बदन, कमर से नीचे पहनी हुई साड़ी और मटकों जैसे चूतड़.. ऐसी कोई स्त्री चलते हुए जा रही हो तो स्वाभाविक तौर पर सब की नजर उस पर चिपक जाएगी.. क्या जवान और क्या बूढ़े.. जो भी देखता था.. देखकर ही अपने लंड एडजस्ट करने लगता था.. कुछ साहसी तो मन ही मन मूठ मारने लगे थे.. जिन बूढ़ों से कुछ हो नहीं पा रहा था वह चक्षु-चोदन का आनंद ले रहे थे..
घर पहुंचकर शीला बिस्तर पर पड़ी.. सोच रही थी “मदन के आने के बाद ये सब बंद कर देना पड़ेगा.. वैसे मदन के लौटने के बाद इन सब के जरूरत भी नहीं रहेगी.. पर एक बार बाहर का खाने का चस्का लग जाएँ फिर याद तो आएगी ही.. जो होगा देख लेंगे.. जब मौका मिले तब चौका लगा देना ही गनीमत है.. बाकी फिर मदन तो है ही.. !! और इस तरह रूखी के घर जाकर अपना कार्यकरम निपटा लूँ तो मदन को भी पता नहीं चलेगा.. हाँ रूखी की सास का प्रॉब्लेम है.. पर वो बुढ़िया और कितना जिएगी.. ?? जल्दी मर जाएँ तो अच्छा.. झंझट खतम हो.. “
तभी डोरबेल बजने की आवाज आई.. आईने में खुद को ठीक करके शीला बाहर आई और दरवाजा खोला
संजय आया हुआ था..
संजय: “चलिए मम्मी जी, मैं आपको लेने आया हूँ”
शीला आश्चर्य से “लेने आए हो? पर कहाँ जाना है?”
संजय: “आप घर पर अकेली हो.. वैशाली भी चार दिनों बाद लौटेगी.. यहाँ बैठे रहने से तो अच्छा है की आप मेरे साथ चलिए.. मुझे भी कंपनी मिलेगी”
शीला: “लेकिन जाना कहाँ है??” शीला असमंजस में थी
संजय: “आप तीन दिन के कपड़े पैक कर लो.. कहाँ जाना है ये मैं बाद में बताता हूँ.. आप के लिए सरप्राइज़ है.. अभी नहीं बताऊँगा”
शीला: “नहीं.. ऐसे मैं घर छोड़कर नहीं चल सकती.. “
संजय: “मम्मी जी, आपको वैशाली की कसम.. किस बात का डर है आपको?”
शीला: “डर नहीं है बेटा.. पर सोचना तो पड़ता है ना.. !!”
संजय: “अपने दामाद के साथ चलने में क्या सोचना?? चलिए एक घंटे में निकलना है.. आप कपड़े पेक कीजिए.. अभी गाड़ी आती ही होगी”
शीला: “अरे पर मुझे ये तो बताओ की जाना कहाँ है?”
संजय: “आपको मुझ पर भरोसा नहीं है? “
शीला मन में सोचने लगी.. “भरोसा तो पूरा है तुझ पर मादरचोद.. की तू एक नंबर का कमीना है.. इसीलिए तो इतना सोचना पड़ रहा है” शीला को पता नहीं चल रहा था की वो क्या करें
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माउंट आबू पहुंचते ही वहाँ के मदहोश वातावरण को देखकर सब रोमेन्टीक होने लगे.. वैशाली बार बार पीयूष की ओर देख रही थी.. वो सोच रही थी की एक बार अगर आधा घंटा पीयूष के साथ कहीं बाहर निकलने का मौका मिले तो मज़ा आ जाए.. जी भर कर पीयूष के साथ मजे करूंगी अगर ऐसा हुआ तो.. उस दिन रेत के ढेर में पीयूष ने जिस तरह उसके जिस्म को रौंदा था.. आह.. याद करते ही मज़ा आ गया.. वातावरण और विचारों के संगम से वैशाली की चुत में झटके लगने लगे थे.. दूसरी तरफ मौसम के कडक स्तनों को देखकर ठंडी आहें भर रही थी वैशाली.. अभी तक किसी मर्द का हाथ नहीं लगा है.. इसलिए मस्त टाइट है.. एक बार किसी का हाथ लगते ही आकार बिगड़ जाएगा.. वैशाली अपने खुद का भूतकाल याद करने लगी..
शुरुआत के समय में जब संजय के साथ सब ठीक चल रहा था तब संजय को उसके स्तन कितने पसंद थे!! जितनी बार वो दोनों अकेले पड़ते थे तब सब से पहले संजय उसके स्तन चूसता था.. कभी कभी किचन में वो काम कर रही हो.. सास ससुर बाहर बैठे हो.. तब भी संजय चुपके से आकर.. उसका टॉप ऊपर करके उसके बबले चूसकर भाग जाता.. वैशाली लाख मना करती पर वो मानता ही नहीं था.. वैशाली सोचती की उसका पति उसे कितना प्यार करता था.. !!! जब कोई अपने पीछे पागल हो तो कितना अच्छा लगता है.. !! वैसा ही वैशाली को महसूस होता था.. तकलीफ तो तब होती थी जब घर पर मेहमान आए हुए हो.. पूरा घर भरा हुआ हो तब संजय को अपनी चुची चुसवा पाना बेहद कठिन हो जाता था.. पर संजय इतना जिद्दी था की उसके बॉल चूसे बगैर हटता ही नहीं था..एक बार तो ज्यादा मेहमान होने की वजह से संजय-वैशाली के बेडरूम में भी ४ लोग सोये हुए थे.. तब भी संजय चादर के नीचे घुसकर वैशाली की निप्पलों को चूसने के बाद ही सोता था.. अपने दांत निप्पल में ऐसे गाड़ देता की दूसरे दिन वैशाली को दर्द होता रहता.. कितने सुहाने दिन थे वोह..!!!
पर वो वक्त जल्दी ही खतम हो गया.. संजय अपनी असलियत पर आ गया.. और फिर जो दुख के दिन शुरू हुए वो अब तक चल रहे थे.. संजय की याद आते ही वैशाली के चेहरे पर विषाद के भाव आ गए
कविता भी पीयूष को देख रही थी.. पर पीयूष जैसे उसे जानता ही न हो वैसे खिड़की से बाहर.. पहाड़ों के टेढ़े मेढ़े रास्तों को.. और दूर दिख रहे उत्तुंग शिखरों को देखने में व्यस्त था.. ये मर्द हमारे दिल का दर्द कब समझेंगे? पीयूष हमेशा अपने एंगल से ही सोचता है.. कभी उसने मेरे दृष्टिकोण को समझने का प्रयास ही नहीं किया.. मुझे इसीलिए तो पिंटू इतना पसंद है.. पिंटू की बात ही निराली थी.. जब साथ पढ़ाई करते थे तब एक बार पिंटू के मुंह से प्याज की बदबू आ रही थी.. कविता ने उसे टोका.. उसके बाद पिंटू ने कभी प्याज नहीं खाया.. इतना महत्व देता है वो मुझे.. सारे मर्द अगर ऐसे ही हमारी भावनाओं को समझे तो औरत अपना सबकुछ समर्पित कर दे उसे..
ऐसा नहीं था की कविता को पीयूष से प्यार नहीं था.. बस ऐसी ही छोटी छोटी बातों को लेकर असंतोष था.. पर ऐसी बातों पर अगर वक्त पर ध्यान न दिया जाएँ तो आगे जाकर यही बातें भयानक स्वरूप धारण कर लेती है..
माउंट आबू के नज़ारों का अगर कोई सब से ज्यादा आनंद ले रहा था तो वोह थे.. राजेश, रेणुका, फाल्गुनी और सब की आँखों का तारा.. मौसम !!
मौसम के कच्चे कुँवारे बदन को देखकर राजेश का लंड पेंट के अंदर.. सेंसेक्स और निफ्टी की तरह ऊपर उठ रहा था.. मौसम के गालों के डिम्पल देखकर राजेश की हवस जलने लगती थी.. गोरी सुंदर मौसम के टाइट ड्रेस के अंदर छुपे हुए अमरूद साइज़ के स्तन देखकर राजेश के पूरे बदन में घंटियाँ बजने लगती थी.. वो सोच रहा था “कुछ भी करके ईसे पटाना होगा.. ” मन ही मन.. मौसम के जोबन को लूटने के ख्वाब देखते हुए राजेश ने रेणुका से पूछा
राजेश: “ये मौसम कहाँ तक पढ़ी है? अगर उसे कंप्युटर चलाना आता हो हमारी ऑफिस में एक जगह खाली है.. तू पूछकर देखना अगर वह नौकरी करना चाहती हो तो “
रेणुका के दिमाग की बत्ती जल गई.. औरतों के पास एक खास छठी इंद्रिय होती है.. जो उन्हे अपने आसपास के मर्दों की नजर के बारे में आगाह कर देती है.. ५० फिट दूर खड़े पुरुष की नजर कहाँ है वह औरतें एक पल में जान लेती है.. कुदरत ने जब औरतों को रूप दिया तो उसको संभालने के लिए ये शक्ति भी साथ ही दी..
रेणुका: “तुम चिंता मत करो राजेश.. मैं बात कर लूँगी.. तू एक बार पीयूष को पूछ ले.. मैं मौसम से डाइरेक्ट बात करती हूँ” रेणुका ने एक कुटिल मुस्कान के साथ राजेश को कहा.. राजेश को इस मुस्कुराहट का अर्थ समझ में नहीं आया.. वैसे मर्दों को औरतों की आधी बातें समझ में ही कहाँ आती है !!!
इन सब बातों से बेखबर पीयूष.. खिड़की से बाहर नजर आते अप्रतिम कुदरती नज़ारों का आनंद ले रहा था.. चारों तरफ पहाड़ ही पहाड़.. हरे घने जंगल.. पतली सी घुमावदार सड़क.. बादलों से बातें करते हुए शिखर.. आहाहाहा.. देखकर ही मन प्रफुल्लित हो जाता था.. नशा सा हो जाता था देखकर.. अगर इंसान को पीना आता हो.. तो ऐसी कौन सी चीज है जो शराब नहीं है.. !!!
“दोस्तों, दस मिनट में हम माउंट के ऊपर पहुँच जाएंगे.. आपकी पर्सनल शॉपिंग के अलावा जो भी खर्च होगा वो मैडम ही देगी.. इन्जॉय योरसेल्फ पर थोड़ा कंट्रोल भी रखना” हँसते हुए राजेश ने घोषणा की..राजेश का इशारा किस तरफ था वो सब समझ गए.. गुजरात से अधिकतर लोग माउंट आबू शराब पीने ही आते है.. पीने वालों के लिए यह जगह स्वर्ग से कम नहीं है.. सब का दिल कर रहा था की कब होटल पहुंचे और शराब की महफ़िल जमाए.. राजेश की घोषणा का सबने तालियों से स्वागत किया.. साथ ही सब अपना समान इकठ्ठा करने लगे
जैसे ही बस रुकी.. सब धीरे धीरे नीचे उतरे.. पहाड़ की तलहटी पर एक सुंदर आलीशान होटल थी.. माउंट आबू का वातावरण वाकई बेहद उत्तेजक था.. फेशनेबल छोटे छोटे कपड़े पहनी लड़कियां.. अपने टाइट टॉप के ऊपर से आधे स्तन बाहर दिखाती हुई चले जा रही थी.. कुछ फिरंगी टुरिस्ट भी नजर आ रहे थे.. पास ही से गुजर रही एक फिरंगी लड़की की लो-नेक टॉप से नजर आ रही क्लीवेज को देखकर अपना लंड खुजा रहे पिंटू को गुस्से देख रही थी कविता.. वह सोच रही थी.. इन मर्दों को सारी औरतों की छातियों में ऐसा क्या दिख जाता है जो वहीं देखते रहते है.. !! सब के सब साले नालायक!!
रेणुका के कहने पर, मौसम और फाल्गुनी को एक अलग कमरा दे दिया गया.. होटल के तीसरे माले पर सुंदर बालकनी वाला कमरा उन दोनों को देखते ही पसंद आ गया.. फाल्गुनी ने इंटरकॉम पर फोन लगाकर एक कडक कॉफी का ऑर्डर दिया.. मौसम ने अपने लिए चाय बोली.. पहले तो दोनों ने अपने तंग कपड़े उतार दिए और आरामदायक टीशर्ट और शॉर्ट्स पहन लिए.. बाहर बालकनी में खड़े रहकर बादलों को गुजरते देखा जा सकता था उतनी ऊंचाई पर थी होटल.. दोनों लड़कियां खुश होकर बादलों संग खेलने लगी..
माउंट आबू का वातावरण इतना अद्भुत है की अगर कोई बीमार यहाँ आकर रहें तो कुछ ही दिनों में ठीक होकर वापिस लौटे.. बालकनी में टेबल पर पैर जमाकर दोनों सहेलियाँ चाय और कॉफी की चुस्की लेने लगी.. मौसम के माउंट आबू पर प्रवेश करते ही जैसे पूरे पर्वत की सुंदरता दोगुनी हो गई थी.. उसे गोरे गालों में पड़ते खड्डों के सामने नक्की लेक की सुंदरता भी फीकी लग रही थी.. उसके मस्त स्तनों के आगे पहाड़ों की उछाइयाँ भी कम पड़ती नजर आ रही थी
बालकनी में बैठे दोनों कुंवारी अल्हड़ लड़कियां.. दुनियादारी से बेफिक्र होकर मजे लूट रही थी.. फाल्गुनी अक्सर शांत रहती.. पर अकेले में अपनी सहेली के साथ वह भी खुल गई थी.. उसके चेहरे पर निर्दोषता के साथ साथ एक अजीब सा डर और घबराहट छुपे हुए थे..
दोनों सहेलियाँ अपनी दुनिया में मस्त थी तभी वहाँ पीयूष आया.. पीयूष ने मौसम का चाय का कप उठाया और पीने लगा..
पीयूष: “क्यों साली साहेबा!! सब कुछ ठीक है ना!!”
मौसम: “अरे जीजू आप मेरी झूठी चाय क्यों पी रहे हो.. कहते है की किसी का झूठा खाएं या पिए तो उनके जैसे बन जाते है”
पीयूष: “हा हा हा.. मौसम अगर मैं तेरे जैसा बन गया तो सब से पहले राजेश सर को ही पागल कर दूंगा.. जिससे की मेरी तनख्वाह बढ़ जाए.. “
फाल्गुनी ने हँसते हुए कहा.. “इसका मतलब ये हुआ की मौसम ने राजेश सर को पागल बना दिया है.. सही कहा न मैंने?”
पीयूष: “हाँ यार.. बस में वो मौसम को ही देखें जा रहे थे.. मेरे खयाल से वो मौसम पर लाइन मार रहे थे”
मौसम: “क्या जीजू आप भी!! कुछ भी उल्टा सीधा बोलते हो.. ” कृत्रिम क्रोध के साथ मौसम ने कहा
फाल्गुनी बैठे बैठे साली और बहनोई की शरारती बातों का मज़ा ले रही थी..
“क्या बात है पीयूष? अपनी साली को मेरे खिलाफ क्यों भड़का रहा है?” राजेश सर की एंट्री हुई..
पीयूष: “अरे सर.. आइए आइए.. हम आप की ही बात कर रहे थे.. मेरी साली तो आपकी तारीफ करते हुए थक ही नहीं रही.. कहती है की जीजू आपके बॉस कितने अच्छे इंसान है.. स्टाफ का कितना खयाल रखते है !!”
राजेश: “तुम चाहो तो.. मतलब अगर मिस मौसम चाहे तो वो भी इस स्टाफ का हिस्सा बन सकती है.. शर्त सिर्फ इतनी है की उसे कंप्युटर चलना आना चाहिए.. हमारी ऑफिस में वैसे भी एक कंप्युटर ऑपरेटर की जरूरत है.. और उस स्थान के लिए मौसम बिलकूल परफेक्ट है”
स्लीवलेसस टीशर्ट पहन कर बैठी मौसम के उरोजों को एकदम करीब से देखकर पागल हो रहा था राजेश.. स्लीवलेस टीशर्ट इतनी ढीली थी की मौसम के हाथ ऊपर करने पर साइड से उसका आधा खुला स्तन नजर आ जाता था.. संगेमरमर जैसी चिकनी काँखों को देखकर पीयूष का लंड भी सलामी देने लगा.. राजेश का लंड तो पेंट के अंदर मुजरा करने लगा था.. मौसम के कातिल हुस्न ने एक ही बॉल में दो विकेट गिरा दी थी.. टेबल पर पैर रखकर बैठी फाल्गुनी की शॉर्ट्स से उसकी गोरी मस्त जांघें बड़ी खतरनाक लग रही थी.. राजेश द्विधा में था.. मौसम को देखूँ या फाल्गुनी को?
मौसम और फाल्गुनी की कच्ची जवानी ने जैसे समय को बांध दिया था.. राजेश किस काम के लिए यहाँ आया था वोही भूल गया.. संस्कारी घर की लड़कियां वैसे तो नादान थी.. पर दो जवान हेंडसम मर्दों की उपस्थिति और माउंट आबू के मदमस्त वातावरण का असर उन दोनों पर भी हो रहा था.. जिस तरह मौसम और फाल्गुनी के हुस्न को देखकर पीयूष और राजेश की हालत खराब थी.. वैसे ही उन दोनों लड़कियों की चुत में भए सुरसुराहट हो रही थी.. जवानी का करंट उन दोनों को भी लग चुका था.. बातें करते करते राजेश और पीयूष मौसम के स्तनों को देखते हुए पिघल रहे थे..
राजेश: “अरे पीयूष.. मैं जो बात करने आया था वो तो भूल ही गया.. रात को हम मैडम के बर्थडे के लिए फ़ंक्शन रखने वाले है.. मैं उन्हे कोई अच्छा सा मस्त गिफ्ट देना चाहता हूँ.. मैं चाहता हूँ की तुम और कविता किसी दुकान से अच्छी सी गिफ्ट लेकर आओ.. !!”
कविता का नाम सुनते ही पीयूष का मूड खराब हो गया.. “कविता को गिफ्ट लेने में कुछ पता नहीं चलेगा.. वो तो शॉपिंग करते वक्त भी मुझे साथ लेकर चलती है.. एक काम करता हूँ.. मैं और मौसम गिफ्ट लेने चले जाते है.. मौसम, चलोगी न मेरे साथ?”
मौसम: “हाँ हाँ.. क्यों नहीं.. फाल्गुनी को भी साथ ले लेंगे”
“कबाब में हड्डी” पीयूष मन ही मन बोला
फाल्गुनी: “नहीं.. मैं कबाब में हड्डी बनना नहीं चाहती.. मैं नहीं आऊँगी” चोंक गया पीयूष.. !!! ये फाल्गुनी ने उसके मन की बात कैसे जान ली.. !!! और वो भी उन्ही शब्दों में जैसा उसने मन में सोचा था !!! बचकर रहना पड़ेगा इस कबूतरी से.. कहीं इसने मेरे दिमाग में रेणुका के लिए जो खयाल है वो पढ़ लिए तो गजब हो जाएगा.. !!!
राजेश ने वॉलेट से १०,००० रुपये निकालकर देते हुए कहा “ये लो पीयूष दस हजार है.. तुम्हें और मौसम को जो गिफ्ट पसंद आए वो ले आना.. लेडिज की पसंद का पता दूसरी लेडिज को ही ज्यादा होता है.. कुछ कन्फ्यूजन हो तो फोन करना”
पीयूष: “ठीक है सर.. “
साली-जीजू की जोड़ी माउंट आबू के बाजार की तरफ निकल गई.. बाजार में दोनों तरफ दुकानों की लंबी कतार थी.. बीच का रास्ता काफी संकरा था और पार्क कीये हुए वाहनों के कारण और भी छोटा हो गया था.. थोड़ी भीड़ भी थी.. इसी कारण चलते वक्त मौसम के स्तन कई बार पीयूष के हाथों पर और पीठ पर छु जाते.. पीयूष सोच रहा था.. हाय रे मेरी किस्मत.. कविता की जगह अगर इसके साथ मेरा ब्याह हुआ होता तो तो पूरी ज़िंदगी जन्नत बन जाती.. पत्नी और मोबाइल दोनों किस्सों में यही होता है.. अपना वाला ले लो उसके बाद ही मार्केट में नए बढ़िया पीस आने लगते है.. जैसी मेरी किस्मत.. !! काश ये नए कंचे जैसा टंच माल एक बार इस्तेमाल करने के लिए मिल जाए !!
ये पहली बार था की मौसम और पीयूष अकेले मिले हो.. वैसे मौसम को पीयूष की कंपनी बेहद पसंद थी.. और उसे यह भी अंदेशा था की बाकी सारे जीजाजीओ की तरह.. उसके जीजू की नजर भी उसपर थी.. वैसे साली-जीजू के संबंध में थोड़ी बहोत शरारत तो चलती है.. ऐसा मौसम का मानना था.. मौसम पर माउंट आबू के दिलकश वातावरण का सुरूर धीरे धीरे छा रहा था..
एक गिफ्ट शॉप का बोर्ड देखकर दोनों अंदर घुसे.. रीसेप्शन पर खड़ी सुंदर लड़की ने उनका स्वागत किया.. मौसम ने पूरी दुकान पर नजर दौड़ा दी पर उसे कुछ खास पसंद नहीं आया.. उसने पीयूष को इस बारे में इशारा किया और वो दोनों दुकान से बाहर निकलने ही वाले थे तभी.. एक ४५ वर्ष के करीब की उम्र का पुरुष उनके पास आया और बोला
“May I help you gentleman and lady? If your choice is not hear..don’t be disappointed. We have another part of this store, where you can get what you want. I am sure you will like something there.. Because that part of our shop is secret and safe. New couples like you love the items over there.. Would you like to visit?”
(आपकी पसंद की चीज यहाँ न मिली हो तो निराश होने की जरूरत नहीं है.. हमारी शॉप का एक दूसरा हिस्सा भी है जहां पर आप जो चाहो वो मिल जाएगा.. मुझे यकीन है की वहाँ पर आपको कुछ न कुछ जरूर पसंद आ जाएगा.. शॉप का वह दूसरा हिस्सा गोपनीय और सलामत है और सिर्फ खास लोगों के लिए है.. आप जैसे नवविवाहित जोड़ों की पसंद की बहोत सी चीजें है वहाँ.. आप चलोगे?)
मौसम: “हाँ हाँ.. क्यों नहीं.. लेट्स गो”
आदमी: “ठीक है.. आप उस कोने से बायीं तरफ मुड़ जाना.. वहाँ एक दरवाजा होगा.. तीन बार खटखटाइएगा.. तो दरवाजा खुल जाएगा”
अंदर क्या होगा इस अपेक्षा में रोमांचित होकर दोनों उस दरवाजे तक गए.. तीन बार दस्तक देने पर दरवाजा खुला.. बाहर से देखने पर वो दरवाजे जैसा लगता भी नहीं था.. पीयूष को थोड़ी सी घबराहट हो रही थी.. अनजान जगह पर मौसम ले कर जाने में उसे डर लग रहा था.. लेकिन मौसम ने उसका हाथ पकड़कर खींच लिया और अंदर ले गई..
आगे छोटा सा पेसेज पार किया तो दूसरा दरवाजा आया.. ऐसे तीन और विचित्र दरवाजों को पार करने के बाद एक बड़ा सा हॉल दिखा.. काफी अंधेरा था.. एसी की तेज हवा से अंदर काफी ठंडक थी.. भव्य सुशोभन भी किया हुआ था..
“वेलकम सर एंड मैडम.. ” कहीं से एक सुरीली आवाज ने उनका स्वागत किया.. दोनों ने आवाज की दिशा में देखा तो एक सुंदर स्त्री खड़ी थी और उन्हे पास बुला रही थी.. दोनों धीरे धीरे चलते हुए उसके पास गए
मौसम: “यहाँ इतना अंधेरा क्यों है?”
सेल्सगर्ल: “इसलिए की आपको शर्म न आए मैडम.. जो मैं दिखाना चाहती हूँ उसके लिए तैयार हो जाइए” कहते ही उसने लाइट ऑन की.. शोकैस में ढेर सारी चीजें रखी हुई थी जो अब नजर आ रही थी.. मौसम को तो ज्यादा कुछ पता नहीं चला पर पीयूष की देखकर ही गांड फट गई.. उससे भी ज्यादा झटका तब लगा जब रोशनी में उस सेल्सगर्ल को वो ठीक से देख पाया.. वो लड़की टॉपलेस थी !!! पूरी दुकान में लड़कियों और औरतों के मूठ मारने के लिए विविध उपकरण भरे हुए थे.. इलेक्ट्रॉनिक और मकैनिकल.. उत्तेजक परफ़्यूमस.. पॉर्न डीवीडी.. नंगे पोस्टर्स.. सजे हुए थे.. एक पोस्टर पर लंबे मोटे लंड वाले कल्लू को देखकर मौसम के होश उड़ गए.. शर्म से उसकी आँखें झुक गई
मौसम: “छी छी छी.. ये सब क्या है जीजू?” शॉप में रखी सारी चीजों के अलावा उस अधनंगी सेल्सगर्ल को देखकर चोंक उठी मौसम
अपने स्तनों को मटकाते हुए वह सेल्सगर्ल बोली “मैडम, आजकल लैटस्ट यही चल रहा है गिफ्ट देने के लिए.. पुराना ज़माना गया.. ये देखिए.. ये डिल्डो.. मेईड इन जर्मनी.. फुली ऑटोमैटिक.. आपके पति की गैरमौजूदगी में ये आपको पूरा संतोष देगा.. स्पीड ज्यादा कम कर सकते है.. वॉटरप्रूफ है.. बाथरूम में भी इस्तेमाल कर सकते है.. और ये बटन दबाते ही अंडर डिस्चार्ज भी होगा.. है ना मजे की चीज? सिर्फ ६००० का है.. पूरा सिलिकॉन से बना है.. एकदम अरिजनल वाली फिल आएगी जब अंदर डालोगी तब.. ट्राय करके देखिए एक बार” वह लगातार बोले जा रही थी
मौसम का शरीर कांप रहा था.. पीयूष की स्थिति ऐसी थी की वह कुछ बोल ही नहीं पा रहा था..
सेल्सगर्ल: “एक बात बताइए मैडम.. आपके हसबंड हफ्ते में कितनी बार आपसे सेक्स करते है?”
मौसम शरमाकर नीचे देखने लगी
आखिर में पीयूष बोला.. “मैडम, ये मेरी पत्नी नहीं है.. मेरी साली है.. और अभी कुंवारी है”
सेल्सगर्ल: “ओह्ह सॉरी.. यहाँ आने वाले अधिकतर लोग शादीशुदा होते है.. इसलिए मुझे गलतफहमी हो गई.. इनको शर्म आना स्वाभाविक है.. पर मैडम जीने का मज़ा तभी आता है जब आप शर्म छोड़ देगी.. जब आपकी शादी हो जाए तब यहाँ जरूर आना मैडम.. आपको नई नई चीजें देखने को मिलेगी.. और सर आप अपनी वाइफ को लेकर आइए.. उनका दिल खुश कर दूँगी”
बिना कुछ कहे मौसम और पीयूष दुकान के बाहर निकल गए.. थोड़े दूर जाने तक दोनों ने एक दूसरे से कुछ नहीं कहा..
आखिर मौसम ने मौन तोड़ा “अच्छा हुआ हम वहाँ से निकाल गए, जीजू..”
पीयूष: “जो भी हुआ अनजाने में हुआ.. हमें थोड़े ही पता था की अंदर ऐसा सब होगा? चलो तुझे कुछ नया जानने को तो मिला.. अपने पति को लेकर आना इधर.. वैसे मैं कविता को शाम को यहाँ लेकर आने की सोच रहा हूँ”
मौसम: “हाँ हाँ जरूर लेकर आना” मौसम ये सोच रही थी की जीजू दीदी को यहाँ क्यों लेकर आना चाहते है? खैर, वो उन दोनों की पर्सनल बात है मैं जानकर क्या करूंगी.. !!!
मौसम: जीजू, एक घंटा बीत गया.. अभी गिफ्ट लेना बाकी है.. जल्दी कीजिए वरना दीदी शक करेगी.. की कहीं हम दोनों साथ भाग तो नहीं गए?”
पीयूष: “अरे ऐसे मेरे नसीब कहाँ.. !!! तू भागने के लिए राजी हो तो मैं तैयार हूँ.. वैसे भी साली तो आधी घरवाली होती है.. उस हिसाब से तेरी कमर के ऊपर के हिस्से पर तो मेरा हक है ही.. और अगर तू कमर के नीचे का हिस्सा देने को तैयार हो तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है !!”
गुस्से का अभिनय करते हुए मौसम ने कहा “हाँ हाँ.. दीदी को पूछकर आपको बता दूँगी.. अब हम गिफ्ट लेने का काम निपटा दे?” कविता का नाम सुनते ही पीयूष सपनों के आसमान से वास्तविकता की धरती पर आ गिरा
पीयूष ने मौसम का हाथ पकड़ लिया.. मौसम ने कोई विरोध नहीं किया.. कैसे करती.. अभी थोड़ी देर पहले जो जीजू के साथ अलग अलग तरह के नकली लंड देखने के बाद वो भी थोड़ी सी उत्तेजित हो गई थी
एक बड़ी दुकान के अंदर वो दोनों गए.. अंदर जाते ही सब से पहले उसने दुकान वाले को बोल दिया.. “हम दोनों पति पत्नी नहीं है.. रिलेटिव है ठीक है!!” दुकान वाले को पता नहीं चला की यह मैडम ने आते ही ऐसी बात क्यों की
पीयूष भी यह सुनकर हंसने लगा..
मौसम: “फिर से उस दुकान में हुआ वैसा कोई लोचा हो उससे अच्छा पहले ही बता दिया”
पीयूष ने मौसम के कान में कहा “वैसे वहाँ जो चीजें थी वो बड़ी जबरदस्त थी.. तुझे कैसी लगी थी?”
“चुप्पपपपप.. ” कहते हुए हल्की सी थप्पड़ लगाई मौसम ने पीयूष के गालों पर
पीयूष: “ओह्ह मौसम.. तू कितनी क्यूट है यार.. तुझे देखते ही मेरी नियत खराब हो जाती है.. एक किस करने का मन हो रहा है मुझे”
मौसम: “क्या जीजू आप भी!!! कोई देखेगा तो क्या सोचेगा हमारे बारे में?”
पीयूष: “अरे यार.. यहाँ हमें जानता ही कौन है !! अभी तूने बताया न होता तो इस दुकान वाले को थोड़े ही पता चलता की हम पति पत्नी नहीं है.. वैसे भी तू मेरी पत्नी जैसी ही लगती है.. एक किस तो कर ही सकता हूँ.. “
मौसम पीयूष के होंठों को देखती रही.. इस डर से की कहीं सब के सामने ही जीजू कुछ उल्टा सीधा कर न दे.. पर पीयूष से अब ओर रहा नहीं जा रहा था.. शॉप के एक हिस्से में बहोत सारे लेडिज ड्रेस लटके हुए थे.. पीयूष मौसम का हाथ पकड़कर उन ड्रेस के पीछे ले गया.. यहाँ से उन्हे कोई देख नहीं पा रहा था.. पीयूष ने मौसम को अपने आगोश में भर लिया और एक जबरदस्त किस कर दी.. “ओह मौसम.. आई लव यू.. यू आर सो हॉट मेरी जान” कहते हुए एक और बार उसने मौसम के गुलाबी होंठों को चूम लिया
“आह्ह जीजू.. इशशशश.. ” शर्म से लाल लाल हो गई मौसम.. मौसम के जिस्म से एक अजीब उत्तेजक खुश्बू आ रही थी.. पीयूष सोचने लगा.. कहीं उत्तेजित मौसम की चुनमुनिया की खुश्बू तो नहीं है वो.. पीयूष के पतलून में माउंट आबू से भी ऊंचा उभार आ गया.. जो उसके पेंट की चैन तोड़ देने की धमकी दे रहा था
मौसम स्तब्ध होकर मूर्ति सी खड़ी रह गई.. उसके जीवन की ये प्रथम किस.. आह्ह.. जैसे मौसम की पहली बारिश.. जैसे सरसराती हवा.. जैसे ताज़ा खिला हुआ गुलाब.. जैसे पहाड़ों से बहता हुआ झरना.. जैसे जीवन का पहला ऑर्गैज़म.. !!! रोमांच से थर थर कांप रही थी मौसम.. जिंदगी में पहली बार किसी मर्द ने इस तरह छुआ था उसे.. यह स्पर्श इतना मधुर लगेगा उसका अंदाजा नहीं था मौसम को.. उसकी दोनों जांघों के बीच कुछ अजीब सी अनुभूति हो रही थी.. जो वह समझ नहीं पा रही थी..
मौसम के हावभाव देखकर पीयूष को इतना तो यकीन हो गया की उसे अच्छा लगा था.. उस दुकान से उन्होंने एक अच्छा सा ड्रेस पेक करवाया और दोनों दुकान से बाहर निकल गए.. मौसम तेज कदमों से आगे चल रही थी और पीयूष उसके पीछे पीछे.. पीयूष ने और एक साहस कर दिया.. अपने मध्यम कद के कूल्हे मटकाते चल रही मौसम के एक चूतड़ को अपनी हथेली से दबा दिया..
मौसम रुककर पीछे देखने लगी और बोली “बस जीजू.. बहोत हो गया.. “
पीयूष हँसकर उसके करीब आया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसके साथ ही चलने लगा..
पीयूष ने चलते चलते धीरे से उसके कानों में कहा “मौसम, आई लव यू.. टेल मे यू ऑलसो लव मी.. प्लीज मौसम प्लीज.. !!”
मौसम के हुस्न ने पीयूष को अंधा बना दिया था.. वह अभी अपना सबकुछ मौसम को समर्पित करने के लिए तैयार था.. बदले में सिर्फ मौसम का दिल चाहता था.. आज मिले इस मौके का वह भरपूर फायदा उठाना चाहता था.. जीवन की प्रथम किस के नशे ने मौसम को ऐसा भ्रमित कर दिया था की उसे ये भी खयाल नहीं आया की पीयूष उसकी बहन का पति था
मौसम: “आई लव यू टू, जीजू.. पर किसी को ये पता नहीं चलना चाहिए.. वरना आफत आ जाएगी.. मुझे आपके साथ बहोत अच्छा लगता है”
मौसम की कमर पर ओर जोर से पकड़ बनाई पीयूष ने.. और अपनी ओर खींच लिया.. वह ऐसा महसूस कर रहा था जैसे उसका जीवन सफल हो गया हो
पीयूष: “मौसम.. चल यार.. वो वाली दुकान पर वापिस चलते है”
मौसम: “नहीं जीजू.. हम उस लड़की को बता चुके है की हम पति पत्नी नहीं है.. अब वापिस जाएंगे तो वो लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे?”
एक दुकान के बार बैठक पर मौसम बैठ गई
पीयूष: “क्या हुआ? थक गई ?”
मौसम: “नहीं जीजू.. मुझे आपके साथ बैठकर बातें करनी है.. ढेर सारी.. बैठिए ना.. वापिस लौटकर दीदी की मौजूदगी में हम थोड़े ही बात कर पाएंगे.. !!”
पीयूष समझ गया.. इस आजादी और एकांत का फायदा उठाने का मन कर रहा है मौसम को.. पर यहाँ काफी लोग है आजूबाजू.. कहीं खोपचे में ले जाकर इसके संतरे दबाने की तीव्र इच्छा हो रही है.. क्या करू? ऐसी कटिली चीज है की देखते ही लंड बेकाबू हो जाए.. जिस मौसम को में पाना चाहता था वह इतनी आसानी से मेरी झोली में आ गिरेगी इसका अंदाजा नहीं था मुझे.. आग दोनों तरफ बराबर जली हुई है.. पर हाय रे किस्मत.. यहाँ खुली सड़क पर कुछ भी कर पाना नामुमकिन था..
सड़क के किनारे एक कुत्ता.. किसी कुत्तिया की पूत्ती सूंघ रहा था.. देखकर पीयूष को गुस्सा आया.. हम से तो अच्छे ये जानवर है.. जहां मर्जी चोदना शुरू कर सकते है.. ये समाज की हदें और इज्जत की बकचोदी.. बहोत गुस्सा आ रहा था पीयूष को.. उसका लंड उसे बार बार आपे से बाहर जाने की धमकी दे रहा था
मौसम ने पीयूष का हाथ अपनी जांघ पर रख दिया था.. और उस पर उंगलियों से “आई लव यू” लिख रही थी.. इस हरकत से पीयूष अब गुर्राए सांड की तरह हांफने लगा.. अपनी कुहनी से हल्के हल्के मौसम के स्तन को छु रहा था वो..
“जरा धीरे से करो जीजू.. दर्द हो रहा है मुझे” मौसम ने पीयूष के कान में कहा.. वैसे भी बेचारी मौसम को स्तन मसलवाने का अनुभव तो था नहीं.. उसे भला कहाँ पता था की आगे जाकर उसके स्तनों के साथ क्या क्या होने वाला था.. !!
“कितने मस्त है यार तेरे.. अंदर हाथ डालकर दबाने का मन कर रहा है मुझे” पीयूष ने कहा
मौसम ने तुरंत अपना टीशर्ट ठीक कर लिया “नहीं जीजू”
पीयूष: “अगर रात को चांस मिले तो होटल से कहीं जाना है?”
मौसम: “नो जीजू.. रात को कहीं भी जाएंगे तो दीदी को पक्का डाउट जाएगा.. यहाँ से वापिस लौट जाने के बाद हम कुछ भी ऐसा वैसा नहीं करेंगे.. चलिए अब चलते है यहाँ से.. ” गिफ्ट की थैली हाथ में पकड़कर मौसम खड़ी हो गई.. सड़क पर चलते चलते एक सुमसान नाके पर पीयूष ने मौसम को पकड़कर एक जोरदार किस कर दी.. किस करते वक्त पीयूष के हाथ मौसम की चूचियों पर चले गए और उसने मजबूती से उसके नरम संतरे जैसे स्तनों को दबा दिया..
“ओ माँ.. कितनी जोर से दबाया आपने जीजू.. !!! ऐसे भी कोई दबाता है क्या?” टीशर्ट के बाहर निकली हुई ब्रा की पट्टी को अंदर डालते हुए मौसम ने कहा.. पर्स से छोटा सा आईना निकालकर मौसम ने अपना हुलिया चेक किया.. और दो बार किस करने से निकल चुकी लिपस्टिक को फिर से लगा दिया..
To Be Continue….